15 February, 2010

Poem by a Supreme Court Advocate

मेरे पड़ोस वाले घर में , बच्चे बम से खेलते है...
और मेरे बच्चे यहाँ गेंद से...
हर रोज़ युही मज़े से खेलते है..
अक्सर गेंद उनके घर में जाती है..
और उनके बम मेरे घर में आते है...
कल भी एसा ही दिन था, @pune
पडोसी गेंद लोटाते नहीं,
और हम भी उनके बम लोटाते नहीं ...
वो खुश किस्मत है ...
और हम ....

A poem by a friend of friend in context of recent Pune bomb blast... Very touching... Very true...

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